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जहाँ मुर्दो को जलाया जाता है वहां बनाया जा रहा है डोभा।

जहाँ मुर्दो को जलाया जाता है वहां बनाया जा रहा है डोभा।

 जहाँ मुर्दो को जलाया जाता है वहां बनाया जा रहा है डोभा।

मनरेगा आज सरकार द्वारा चलायी जा रही बड़ी सरकारी योजनाओं में से एक है जिसके तहत मजदूरों को 100 दिनों की रोजगार की गारेंटी दि जाती है| ग्रामीण विकाश को धयान में रखते हुए कई योजनाएं लायी जाती है|

इसी के तहत मत्स्य पालन तथा पटवन कार्य के लिए डोभा निर्माण किया जाना था,मगर अधिकारीयों ,दलालों और ठेकेदारों के मिली भगत से डोभा निर्माण का कार्य श्मशान घाट के जमीन पर रातों रात JCB से डोभा बनाया जा रहा था|



क्या है? पूरा मामला 

इचाक : प्रखंड के पुराना इचाक पंचायत के बड़की जलौँध मे श्मशान घाट है जहाँ बरसो से मुर्दो को जलाने का काम किया जाता रहा है लेकिन कुछ दलाल और पंचायत के प्रतिनिधि के हेर फेर के चक्कर मे मुर्दो को जलाने वाला जगह पर भी डोभा का काम रात मे  जेसीबी मशीन से किया गया।सुबह सुबह ग्रामीणों को ज़ब सुचना मिली तो सेकड़ो के तादाद मे लाठी डंडो के साथ समसान घाट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किये। भारी विरोध करने के घंटो बाद डोभा के काम को रुकवाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है की ऐसे स्थान जहाँ पर लाशो को दसको से जलाते आ रहे है वहां पर डोभा बनाना बहुत निंदनीय काम है। दलालो को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है की पंचायत के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल है क्यूंकि बिना परमिशन के किसी दलाल मे इतनी हिम्मत नहीं की ऐसा घटिया काम करे। और चेतावनी देते हुए कहा की ऐसे लोगो को पंचायत के जनता हमेसा बहिष्कार करेगी।और तो और जनता ने अब पुरजोर विरोध करने व बीडीओ मैडम से पुराना इचाक पंचायत मे मनरेगा के कामो को लेकर जाँच कराने की भी मांग करेंगे। जिससे ये पता चल पाय की इस तरह के घटिया काम कितने हुए है और किन किन लोगो का हाथ है। वही ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी से  के पास आवेदन लिखकर युक्त व्यक्ति पर कार्रवाई करने का मांग किया|



यह मामला अपने आप में कई सवाल खड़े करता है|

 इसपर अभी तक चुपी साधे हुए हैं अधिकारी और प्रतिनिधि?

प्रखंड मुख्यालय से  महज 3 किलोमीटर की दुरी पर स्थित जलौंध गावं में ये सब हो रहा है और अधिकारीयों द्वारा अभी तक कोई करवाई नहीं की गयी है| उनका ये कहना भी गलत होगा की मामला संज्ञान में नहीं आया है, क्योकि मनरेगा की सभी योजनाओं का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाता है उसके बाद ही उसे पास किया जाता है|गैरमजुरुआ जमींन और वो भी शमशान घाट की पर डोभा निर्माण का आदेश देने वाले भी शक के घेरे में खड़े हैं| 

ग्रामीणों मे गुस्सा का माहौल?

सुबह सुबह ग्रामीणों को ज़ब सुचना मिली तो सेकड़ो के तादाद मे लाठी डंडो के साथ समसान घाट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किये। भारी विरोध करने के घंटो बाद डोभा के काम को रुकवाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है की ऐसे स्थान जहाँ पर लाशो को दसको से जलाते आ रहे है वहां पर डोभा बनाना बहुत निंदनीय काम है। दलालो को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है की पंचायत के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल है क्यूंकि बिना परमिशन के किसी दलाल मे इतनी हिम्मत नहीं की ऐसा घटिया काम करे। और चेतावनी देते हुए कहा की ऐसे लोगो को पंचायत के जनता हमेसा बहिष्कार करेगी।और तो और जनता ने अब पुरजोर विरोध करने व बीडीओ मैडम से पुराना इचाक पंचायत मे मनरेगा के कामो को लेकर जाँच कराने की भी मांग करेंगे। जिससे ये पता चल पाय की इस तरह के घटिया काम कितने हुए है और किन किन लोगो का हाथ है।

ग्रामीणों द्वारा दिया गया आवेदन



लाशो को जलाने वाला जगह मे डोभा बनाकर पैसा कमाने की फिराक मे है कुछ दलाल ?

नदी के तट पर डोभा निर्माण का कोई औचित्य नहीं इससे साफ होता की किसी तरह गैरमजुरुआ जमींन पर डोभा निर्माण कर पैसा निकासी कर ली जाये और असलियत तो यही है की डोभा निर्माण सिर्फ दिखावा है और असली मकसद सरकारी पैसे का दुरूपयोग है जिसमें अगर जाँच की जाये तो कई बड़े भ्रष्ट अधिकारीयों तथा स्थानीय प्रतिनिधियों के नाम भी शामिल हो सकते हैं |

बात पते की|

तो पते की बात यह है की इस प्रकार की भरी लापरवाही अनियमितता तथा नियमों की अनदेखी बिना अधीकारियों और प्रतिनिधियों के मिली भगत के बिना एक ठेकेदार कर ही नहीं सकता है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए| सरकारी योजनाओं में आने वाला पैसा हम आम लोगों का ही पैसा होता है इसलिए इसे बर्बाद ना होने दें| इसका उपयोग विकाश कार्यों में ही होनी चाहिए| अनियमितता होने पर आवाज उठायें  


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