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 झारखंड के किसान दोहरी आर्थिक मार झेलने को है मजबूर। जानिए क्या है? मामला

झारखंड के किसान दोहरी आर्थिक मार झेलने को है मजबूर। जानिए क्या है? मामला


 हम सब जान रहे हैं कि इस वक्त कोरोना महामारी के कारण लगभग हर वर्ग के लोग आर्थिक मार झेल रहे हैं लेकिन झारखंड के किसान दोहरी आर्थिक मार झेल रहे हैं।

कोरोना के वजह से लगे कड़े प्रतिबंधों के कारण भारी नुकसान


तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के कारण जगह जगह कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं जिससे किसानों की आय में बहुत बड़ा फर्क आया है कहीं-कहीं तो उनकी फसल या सब्जियां नहीं बिक पा रही हैं।

अभी तक नहीं मिला है बिक्री की गई धान का पैसा।



किसानों के द्वारा बिक्री की गई धान जो कि 4 महीने पहले सही बिक्री शुरू हो गई थी उसका पैसा अभी तक किसानों को नहीं मिले हैं जिससे उनके जीविकोपार्जन में समस्या उत्पन्न हो गई है क्योंकि कोरोना के कारण आय बिल्कुल ठप सी हो गई है। और पहले के फसल का भी पैसा अभी तक सरकार ने नहीं चुकाया है ऐसे हालत में किसान करे तो क्या करें।

गेहूं की उपज है बहुत बढ़िया नहीं रही है।



हाल में ही किसानों ने गेहूं की फसल को कांटा है परंतु इस वर्ष गेहूं के फसल की उपज भी बहुत बढ़िया नहीं रहे हैं इस वर्ष लागत है निकाल पाना मुश्किल हो रहा है ऐसे में किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई है ।

इस मुद्दे पर नहीं है किसी का ध्यान

इस कोरोना महामारी के आपदा के रूप लेने के बाद किसानों की इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। भाजपा युवा नेता ओम प्रकाश मेहता ने झारखंड सरकार से धान बिक्री की पैसा किसानों को अविलंब चुकाने की मांग की है ताकि किसानों को मरने के कगार से बचाया जा सके।

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