इचाक प्रखंड में हो रहे सरकारी चापाकलों के निजीकरण पर अधिकारी मौन
जैसे जैसे गर्मी बढ़ रही पेयजल की समस्या उत्प्पन होती जा रही है | कुआँ तालाब सुखने के कगार पर हैं, ऐसे में क्षेत्र में बने चापाकल जो की सरकारी मद से बने हैं उनका निजीकरण होना भी एक समस्या है | प्रखंड के कई गावं में सरकारी चापाकल को चार दिवारी से घेर कर निजी क्षेत्र में करना आम बात हो गया है| जिससे अन्य लोगों को पिने का पानी लेने के लिए दूर तक जाना पड़ता है| आज तक इस चीज़ को लेकर कोई जाँच नही हुई है|
ख़राब पड़े क चापाकलों की भी सुध लेने वाला कोई नहीं है|
प्रखंड क्षेत्र के बरका खुर्द पंचायत के रतनपुर गांव मे हरिजन टोला में 1 वर्ष से चापाकल खराब पड़ा है।इस खराब चापाकल को बनाने के लिए प्रखंड सह अंचल कार्यालय में कई बार आवेदन दिया गया। साथ ही साथ इस संबंध में पीएचडीइचाक डिपार्टमेंट मे भी आवेदन देकर बनाने को लेकर आग्रह किया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार लिखित शिकायत किए जाने के बावजूद भी पदाधिकारी इस मामले को हल्के में ले रहे हैं। साल भर हुए खराब चापाकल को बनाने का आवेदन भी कई बार दी जा चुकी है|उसी प्रकार जलौंध गावं के चौक पे ख़राब पड़े चापाकल भी कई महीनो से ख़राब है पर उसे भी अभी तक मरमत नहीं किया गया है|
अधिकारी साधे हुयें हैं चुपी|
कई गावं के ग्रामीणों का आरोप है की अधिकारीयों को आवेदन देने के बाद भी कोई उचित करवाई नहीं की जाती है |न तो कोई अधिकारी स्वयं संज्ञान लेकर मामले की जाँच करते हैं| प्रखंड प्रतिनिधि जो की रोज क्षेत्र का दौरा करते हैं वो भी मामले को अनदेखा करते हैं| कई ग्रामीणों का कहना है की गावं के कुछ प्रतिष्ठित लोग भी ऐसे कामो को अंजाम देते जिनके खिलाफ ग्रामीण आवेदन देने से बचना चाहते हैं| अतः समय समय पर अधिकारीयों को ऐसे मामले पर स्वयं संज्ञान ले कर उचित करवाई करते रहना चाहिए|
आप से आप तक
आप से आप तक की बात ये है की आपके क्षेत्र में चापाकलों के हो रहे निजीकरण पर आवाज उठायें अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसकी लिखित आवेदन दें| क्योकि ये आपका अधिकार है और अगर कोई आधिकारी आपकी नहीं सुनते तो आप हायर ऑथोरिटी के पास जाएँ क्योकि आपकी आवाज ही हमारे समाज को सुधार कर नयी दिशा दे सकती है|
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